बेहतर इलाज़ की तलाश या बहाने से विदेश प्रवास

राहुल गाँधी जब से twitter पर सक्रिय हुए हैं, भारतीय twitter यूजर की तो मानों मौज आ गई है। ऐसा लगता है भारतीय twitter समुदाय की एक बड़ी आबादी को एक पसंदीदा शिकार मिल गया है। अभी राहुल विदेश प्रवास पर हैं जाने से पहले उन्होने एक ट्वीट किया जिसमें अपने विदेश दौरे का कारण बताते हुए भाजपा के सोशल मीडिया ट्रोल आर्मी के ऊपर भी अपने ही अंदाज़ में जमकर चुटकी ली। और उसके बाद तो बस वही हुआ जिसकी कम से कम कांग्रेस अध्यक्ष को उम्मीद नहीं थी। पहले देखिये क्या लिखा था राहुल गाँधी ने अपने ट्वीट में।

Rahul Gandhi Tweet

राहुल गाँधी ने लिखा,
"कुछ दिनों के लिए भारत से बाहर रहूँगा। सोनिया जी के साथ उनके सालाना मेडिकल चेक अप के लिए। 
BJP के सोशल मीडिया ट्रोल आर्मी के मेरे मित्रों के लिए: ज्यादा मेहनत न करें....मैं जल्द ही लौटूँगा!"

इस ट्वीट के सक्रिय होते ही राहुल गाँधी ट्वीटर यूजर्स के निशाने पर आ गए। कुछ लोगों ने इनका मज़ाक उड़ाना शुरू कर दिया तो कुछ लोगों ने उनपर ज़बरदस्त सवालों के गोले दागे।

Reply To Rahul Gandhi's Tweet

वंदना अग्रवाल नामक एक यूजर ने मज़ाक उड़ाते हुए लिखा "ऐसी कौन सी बीमारी हुई है सोनिया माता को जिसका इलाज भारत में नहीं है?पैसे कम पड़े तो बताना...नोटबंदी वाले 4 हजार अभी बचे हैं क्या?"

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एक अन्य यूजर सूर्य प्रभा ने चुटकी लेते हुए दोनों "माँ-बेटे को गर्मी की छुट्टियों की शुभकामना" दे दी। 

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वहीं राहुल व्यास ने लिखा "सही है, इतने सालों तक लगातार कांग्रेसी शासन के बावजूद आधारभूत संरचनाएं इतनी घटिया हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष को भी उस पर यकीन नहीं। बहरहाल, BJP की निरंतर जीत के लिए हम चाहते हैं कि आप जल्दी लौटें।"

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आकाश जैन नामक यूजर ने तो बकायदा गौरीगंज, अमेठी के राजकीय होमियोपैथिक चिकित्सालय की तस्वीर संलग्न करते हुए लिखा "भाई कल......अगर कोई ज्यादा प्रोब्लेम होगी वहाँ तो टेंशन मत लेना......यहाँ आपके गाँव में इस हॉस्पिटल में मुफ्त में इलाज़ हो जायेगा।"

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आनन्द कुमार सिंह नामक यूजर का आक्रोश उनके सवालिया ट्वीट से जाहिर होता है - "70 सालों में world level का अस्पताल तक नहीं बनवा सके #भ्रष्टाचारी ~ @INCIndia और #Pidi पूछते हैं #मोदी_सरकार_के_4साल में क्या हुआ?"

बहरहाल, अब तक इस ट्वीट पर 12000 से भी अधिक लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों ने जब राहुल के समर्थन में कुछ लिखा तो फिर वो भी लोगों के निशाने पर आ गए और लोगों ने उन्हें भी ट्रोल करना शुरू कर दिया। वैसे, ये उम्मीद तो नहीं है कि राहुल लोगों के सवालों के जवाब देंगे। फिर भी, कुछ सवाल तो लाजिमी ही हैं जैसे-
1. आखिर सोनिया गाँधी की बीमारी क्या है और वो इसका इलाज़ कराने कहाँ जाती है?
2. आखिर सोनिया गाँधी या राहुल गाँधी की विदेश यात्राएं हमेशा गुप्त क्यों होती हैं?
3. आखिर भारत सरकार से मिली सुरक्षा को छोड़ कर बाहर जाने का इनका प्रयोजन क्या होता है?
4. आखिर भारत में इतने सालों तक राज करनेवाली कांग्रेस के बनाए अस्पतालों पर इनका भरोसा क्यों नहीं है? 5. आखिर हर बार विदेश यात्राओं के लिए सोनिया गाँधी या राहुल गाँधी को बहाने बनाने की क्या जरूरत है? 




सभी तस्वीर : twitter screenshot 

तुम कौन हो भाई : भक्त या चाटुकार

तुम कौन हो भाई ? "भक्त" या "चाटुकार" ?  सुनने में ये अजीब लग सकता है लेकिन, आज भारत की अधिकांश आबादी अब सिर्फ इसी दो जाति या धर्म में सिमट कर रह गई है। यकीन नहीं होता तो एक सरसरी निगाह सोशल मीडिया पर हो रही तक़रीरों पर दे डालिए। सोशल मीडिया के वर्चुअल वर्ल्ड में आप किस जाति या धर्म से ताल्लुक रखते हैं ये आपके नाम या उसके साथ जुड़े सरनेम से तय नहीं होता। बल्कि ये तय हो रहा है आपकी राजनैतिक विचारधारा से। भाजपा समर्थकों को विरोधी दलों के लोगों ने "भक्त" कहना शुरू कर दिया प्रत्युत्तर में भाजपा समर्थकों ने विरोधियों को "चाटुकार" की संज्ञा दे डाली। और ये सिलसिला लगातार चल ही रहा है। 

Social Media In Indian Politics


अब पूरी सोशल मीडिया में कोई भी शर्मा जी, सिंह साहब,यादव जी, खान साहब या मि॰ डेविड नहीं रहे। ये सब के सब या तो भक्त हैं या फिर चाटुकार। मीडिया का भी ऐसा ही धर्मांतरण हो चुका है, भक्त मीडिया या चाटुकार मीडिया। हालात ऐसे हो चुके हैं कि कई बार विचारधारा के आधार पर लोगों की वास्तविक जाति या धर्म तक को मानने से इन्कार कर, उन्हें फ़ेक आई डी वाला भी घोषित कर दिया जाता है। इन सारे हालातों की वजह पिछले लोकसभा चुनाव 2014 को माना जाता है। जिसके बारे में कुछ लोग तो यहाँ तक मानते हैं कि भारत में 2014 का लोकसभा चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि ये पहला चुनाव था जो पूरी तरह से Facebook पर लड़ा गया था। 

Social Media

2014 में हुए उस चुनाव के समय से ही राजनीति में सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक बड़े पैमाने पर होना शुरू हो गया था जो अब संभवतः अपने चरम स्थिति पर है। पिछला लोकसभा का चुनाव भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ने का फैसला किया था। जैसा कि सभी जानते हैं उस चुनाव की प्रारम्भिक तैयारियों से ले कर पूरे चुनावी प्रक्रिया के सम्पन्न होने तक भाजपा ने सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग किया। सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर विभिन्न डिजिटल पी॰ आर॰ एजेंसियों की मदद से शानदार कैम्पेन चलाया गया। इस कैम्पेन का ज़बरदस्त फायदा नरेंद्र मोदी और उनकी भाजपा को हुआ। सोशल मीडिया की वजह से बहुत बड़ी तादाद में नरेंद्र मोदी के नए समर्थक बने और उनका जुड़ाव भाजपा से हुआ। इसकी देखा-देखी बाद में लगभग सभी राजनैतिक दलों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल शुरू कर दिया और उनके समर्थकों के अलग-अलग समूह सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हो चुके हैं। 

Social Media Politics


सोशल मीडिया को यदि आधुनिक युग का अड्डा या चौपाल कहें तो शायद कुछ गलत नहीं होगा। वैसे भी बदलते हुए आधुनिक परिवेश में वो पुराने अड्डे या चौपाल बचे ही कहाँ हैं। पहले इन अड्डों चौपालों पर लोग एक कप चाय की चुसकियाँ लेते-लेते जमाने भर की सामाजिक, राजनीतिक, खेल अथवा सिनेमा की चर्चाएँ कर लिया करते थे। अब वो सारी चर्चाएँ घर बैठे, ट्रेन या बस में सफर करते हुए या फिर ऑफिस/दफ्तर में काम करते हुए ही हो जाया करती हैं। Facebook, WhatsApp, Twitter, You Tube या Google+ जैसे अनगिनत प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं। अखबारों, पत्रिकाओं से लेकर टीवी समाचारों तक कि व्याख्या बड़ी ही सहजता और सुगमता के साथ सोशल मीडिया पर ही हो जाती है। बहरहाल, जिस तरह से भारत के सारे जाति और धर्म के लोग अब सिर्फ "भक्त" या "चाटुकार" की श्रेणी में बंटते जा रहे हैं यह हैरान करने वाला है और एक नए विमर्श की शुरुआत करने वाला भी।






सभी तस्वीरें : Google से साभार 

कैसे रहें सुरक्षित निपाह के बढ़ते कहर से

केरल में अब तक एक दर्जन से अधिक लोगों की जान ले चुके "निपाह वायरस" का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। केरल के साथ-साथ अब ये पूरे भारत के लिए एक खतरा बनता जा रहा है। सरकार और अन्य स्वास्थ्य सेवी संस्थाओं के लिए भी ये गहन चिंता का विषय बन चुका है। ऐसा माना जा रहा है की चमगादड़ों की एक विशेष प्रजाति के द्वारा ये वायरस फैल रहा है। 

Nipah Virus  

इस वायरस के संक्रमण का एक कारण सूअरों को भी माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवा विशेषज्ञों के अनुसार निपाह वायरस से बचने के लिए सूअर के माँस के अलावा उन फलों के सेवन से भी बचना चाहिए जिसे चमगादड़ों द्वारा जूठा किए जाने की आशंका हो। मुख्य तौर पर केला, आम, अंगूर और खजूर से बचने की बात कही जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के दावे के अनुसार "निपाह वायरस" चमगादड़ों की एक विशेष प्रजाति "ग्रेटर इंडियन फ्रूट बैट" के मल, मूत्र और लार से फैलता है। 

Fruit Stall

जिस तेजी से इस बीमारी और इसके कारणों की खबर फैलती जा रही है, लोगों में भय और आशंका भी उतनी ही तेजी से बढ़ रही है। इसी भय और आशंका के कारण सरकार ने भी लोगों को इन फलों से परहेज करने को कहा है। लेकिन, इसका बहुत बड़ा खामियाजा फलों के स्थानीय बिक्री एवं निर्यात पर बड़ा ही प्रतिकूल असर पड़ा है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार कई देशों ने दक्षिण भारत से निर्यात होने वाले फलों की खरीद पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। 



तस्वीर सौजन्य : Google

बुलंद हौसलों की दास्तान 6 लेन सह 14 लेन एक्सप्रेस वे का निर्माण

बुलंद हौसलों और अटल इरादों की दास्तान सुनाने को तैयार हो चुका है, 135 किलोमीटर लंबा, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे जो नई दिल्ली से मेरठ तक के रास्ते को न केवल आसान बना देगा, बल्कि दिल्ली और एन सी आर में लगने वाले जाम तथा प्रदूषण की भीषण समस्या से भी निजात दिलाने में कारगर साबित होगा. यह एक्सप्रेस वे नई दिल्ली से डासना (गाज़ियाबाद) तक 14 लेन और शेष 6 लेन का बना है. 

Eastern Peripheral Expressway

मात्र 17 महीने में बने इस एक्सप्रेस वे की खासियत यह है कि इसपर चलते हुए आप न सिर्फ सुविधाजनक तरीके से दूरी तय करेंगे, बल्कि सफ़र का आनंद भी उठा पाएंगे. आपके सफ़र को और सुहावना और आनंददायक बनाने के लिए पूरे  रास्ते हरियाली और पानी के फव्वारों की विशेष व्यवस्था की  गयी है. 135 किलोमीटर के इस सफर को और भी आकर्षक बनाने के लिए पूरे भारत के कुल 36 स्मारकों के लघु प्रतीक बनाये गए हैं  जो आपको सम्पूर्ण भारत दर्शन का अहसास दिलाएगा. 

Miniature Monuments Besides Eastern Peripheral Expressway

इस एक्सप्रेस वे  शिलान्यास नवम्बर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. इस एक्सप्रेस वे के बारे में ये जानना अहम्  है कि इसे तय समय से पहले तैयार कर लिया गया है जो यह साबित करता है कि अगर इरादे नेक हों तथा हौसले बुलंद तो फिर कुछ भी मुमकिन है. इस शानदार एक्सप्रेस वे का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दावे की भी पुष्टि करता है जिसमें उनहोंने कुछ दिन पहले ही कहा था कि जिस किसी भी योजना का वो शिलान्यास करते हैं उसका उद्घाटन भी वही करते हैं.  उनकी योजनाओं की घोषणा चुनावी लाभ के उद्देश्य से नहीं की जाती. 

जब भी मौका मिले इस शानदार ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस वे से गुजरने का यक़ीन करें इसकी तारीफ किये बिना नहीं रह पाएंगे और शायद ज़िंदगी एक सफर है सुहाना  गाने को गुनगुनाने को बाध्य हो जायेंगे.