क्या फेल हो जाएगा काँग्रेस का पेट्रोल बम

नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के चार साल पूरे हो चुके और बस एक साल रह गए हैं अगले आम चुनाव में। देश कुल मिलाकर दो तबकों में बँट चुका है। एक तबका भाजपा सरकार के कामकाज से संतुष्ट नज़र आ रहा है तो दूसरे तबके की परेशानियाँ और शिकायतें थमने का नाम नहीं ले रहीं। इन दोनों तबकों की संतुष्टि और परेशानी की अनेक वजहें हैं। लेकिन, इन दोनों ही तबकों के बीच एक खास वजह है जो एक तबके के लिए जहाँ संतुष्टि का कारण है वहीं दूसरे तबके के लिए सबसे बड़ी परेशानी का सबब भी वही है। और वो वजह है पिछले चार सालों में एक भी भ्रष्टाचार या घोटाले का जाहिर या साबित न होना। अब चुनाव सामने है, समय कम है, विरोध भी करना है। तो, विरोध के लिए मुद्दा भी चाहिए। और अभी वो बड़ा मुद्दा बन गया है पेट्रोल की बढ़ती कीमत। 

Petrol Prices In Major Cities

इसमें कोई संशय नहीं कि बढ़ती हुई पेट्रोल की कीमतें आम जनों के लिए वाकई चिंता और परेशानी का कारण हैं। और सरकार को इसके स्थायी समाधान का रास्ता निकालने की व्यवस्था करनी भी चाहिए। लेकिन, बढ़े हुये पेट्रोल और डीजल की कीमतों के परिप्रेक्ष्य में अगर पिछली सरकार के प्रदर्शन पर गौर करें तो पता चलता है कि वर्तमान सरकार ने पिछली सरकार की तुलना में पेट्रोल डीजल की कीमतों को न सिर्फ ज्यादा बेहतर और संतुलित तरीके से नियंत्रित किया है बल्कि अभी भी कीमतें पिछली काँग्रेस सरकार के अधिकतम स्तर से कम ही है। अंग्रेज़ी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के ताज़ा ऑनलाइन अंक में प्रकाशित लेख तो ऐसा ही बताता है। इंडियन एक्सप्रेस की उक्त लेख को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें।  

Petrol Pump

इंडियन एक्सप्रेस की उपरोक्त खबर बताती है कि पिछले रविवार को पेट्रोल की कीमतों में 10 पैसे कि वृद्धि होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत पिछले चार-पाँच साल के सर्वाधिक स्तर पर पहुँचकर 74.40रु/ली॰ हो गई। वैसे सितंबर 2013 में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 76.06रु/ली॰ थी। कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में भी पिछले सोमवार से ही पेट्रोल की कीमतें अपने पिछले चार साल के अधिकतम क्रमशः 77.20, 82.35 और 77.29रु/ली॰ तक पहुँच गई। वैसे कोलकाता में पेट्रोल की कीमतों का अधिकतम स्तर 78.03रु/ली॰ (अगस्त 2014) में था जबकि, मुंबई का अधिकतम 83.62रु/ली॰ (सितंबर 2013) तथा चेन्नई में सर्वाधिक 77.48रु/ली॰ (सितंबर 2013) में रह चुका है। उपरोक्त सभी आंकड़ों की सत्यता जानने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

Rahul_Gandhi_Challenges_PM_On_Petrol_Prices

जैसा कि ऊपर देख सकते हैं, अभी कुछ दिनों पहले क्रिकेटर विराट कोहली के फ़िटनेस चैलेंज को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वीकार किए जाने पर काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री पर चुटकी लेते हुये उन्हें फ्युल चैलेंज को स्वीकार करने की चुनौती देते हुये कहा कि :
तेलों के दाम कम करें अन्यथा कांग्रेस राष्ट्रव्यापी आंदोलन कर के आपको ऐसा करने को बाध्य करेगी।  
उक्त ट्वीट करने से पहले राहुल गाँधी ने होमवर्क किया था या नहीं या फिर हमेशा की तरह यूँ ही बोल गए ये तो पता नहीं, किन्तु जहां तक पेट्रोल का अर्थशास्त्र है, कम से कम भाजपा का प्रदर्शन कांग्रेस से बुरा तो नहीं ही है। वैसे राहुल गाँधी को ट्विटर पर तो लोगों ने जवाब दिया ही साथ ही भाजपा आईटी सेल ने भी कुछ इस तरह जवाब दिया।

Petrol_Price_Comparison_BJP_Congress_Rule

यूँ तो ये तस्वीर बयान करती है कि काँग्रेस शासन की अपेक्षा भाजपा शासन में पेट्रोल की कीमतों में ज्यादा का उछाल नहीं आया है बल्कि कीमतें संतुलित भी रही हैं। फिर भी इस तस्वीर में बताए गए आंकड़ों की सत्यता के लिए इंडियन ऑयल की वैबसाइट को देखने से ये पता चलता है कि उक्त आंकड़े बिलकुल सही हैं। पेट्रोल की कीमत संबन्धित आंकड़ो को ऑनलाइन देखने के लिए यहाँ क्लिक करें। इन हालातों में अगर देखा जाये तो मोदी सरकार के पास वैसे भी अभी पूरा एक साल बचा है जिसमें वो कभी भी पेट्रोल/डीजल की कीमतों के परिप्रेक्ष्य में कोई बड़ा महत्वपूर्ण फैसला लेकर जनता को खुश कर सकती है। लेकिन तत्काल तो काँग्रेस का मोदी सरकार के विरुद्ध छोड़ा गया ये पेट्रोल बम फेल होता ही दिखता है। 

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