क्या भाजपा ने अपने गले की हड्डी निकालकर विरोधियों के गले में डाल दी है

कश्मीर में राजनीती ने एक बार फिर से नयी करवट ली है और तीन सालों से चली आ रही पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार गिर गयी. राजनीति के लिए गठबंधन सरकारों का बनना और गिरना कोई नयी या बड़ी बात नहीं है. लेकिन, कश्मीर में बनी गठबंधन की सरकार और आज उस गठबंधन के टूट जाने की घटना को एक सामान्य राजनैतिक घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता. कश्मीर में भाजपा का पीडीपी को समर्थन देकर सरकार बनाना भी एक बड़ा राजनैतिक घटनाक्रम था. किन्तु, तीन सालों के बाद भाजपा द्वारा पीडीपी से समर्थन वापस लेकर सरकार को गिरा देना उससे भी बड़े महत्त्व की घटना है.

Map_Of_Kashmir

भाजपा के इस निर्णय की अनेकों व्याख्याएं की जायेंगी और अनेकानेक राय व्यक्त किये जायेंगे. लेकिन, ये तय है कि अपने इस कदम से भाजपा ने एक साथ कई निशाने साधने की चाल चल दी है और विरोधियों को अनायास ही बिलकुल हक्का-बक्का कर दिया है. बेशक, विरोधी कुछ भी बोलें लेकिन भाजपा के इस कदम से उनकी आधी जुबान उनके हलक में अटक सी गयी है. अगर यही परिस्थिति किसी अन्य राज्य में होती तो अब तक दूसरी पार्टियों के सहयोग से सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गयी होती. पर, यहाँ सभी ने अपने हाथ-पैर पीछे खींच लिए हैं और प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है. भाजपा न सिर्फ ये सन्देश देने में सफल हुयी है कि वो सत्ता के लिए देश कि अस्मिता और सुरक्षा के साथ समझौता नहीं कर सकती बल्कि हिन्दू हितों के लिए भी अपनी प्रतिबद्धता साबित करने में सफल हुई है. कैसे पढ़ें अगले पोस्ट में. यहाँ क्लिक करें.

Hindutwa_Dhwaja

ऐसा करके भाजपा ने न सिर्फ अपने गले में फंसी हड्डी निकाल फेंकी है बल्कि वही हड्डी उसने विरोधियों के गले में डाल दी है जो उनके लिए न तो निगलते बन रहा है न उगलते. अब एक तरफ वो सत्ता की लोभी कहलाने से बच गयी तो दूसरी तरफ अब अपने सारे एजेंडे को संवैधानिक तरीके से बिना किसी राजनैतिक दबाव के पूरा करवा सकती है. विरोधी नेशनल कांफ्रेंस नेता अब्दुल्ला ने तो सरकार गिरने के तुरंत बाद ही दुबारा चुनाव कराये जाने की मांग कर दी, लेकिन भाजपा ऐसा कभी नहीं होने देगी. अब कश्मीर एक बार पुनः राष्ट्रपति शासित प्रदेश होगा, जो वहां के अलगाववादियों और हिंदु विरोधी ताक़तों के लिए गंभीर चिंता और दहशत का कारण हो सकता है. जम्मू और कश्मीर में लगा ये राष्ट्रपति शासन पूर्व के सभी राष्ट्रपति शासनों से भिन्न है और इसके मायने भी बिलकुल ही अलग हैं.  


कृपया अपने विचार और सुझाव कमेंट में लिखें.

यदि आप हमारे पोस्ट को पसंद करते हैं तो कृपया हमें फॉलो करें और हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब करें.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें