क्या हामिद अंसारी काँग्रेस के एहसानों का क़र्ज़ अदा कर रहे हैं

जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं काँग्रेस पार्टी अपने मूल चरित्र (मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति) को अपनाने के लिए मजबूर होती दिख रही है, अभी हाल के दिनों में जो बयानों की श्रृंखला काँग्रेस के नेताओं की ओर से जारी हुई है उनसे तो कम से कम ऐसा ही लगता है. तथाकथित मुस्लिम बुद्धिजीवियों से राहुल गाँधी की मुलाक़ात, उसके बाद राहुल गाँधी का ऐलान कि "हाँ--काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी है", और इसके बाद तो बयानों की जो श्रृंखला शुरू हुई तो ऐसा लगा मानों हर कांग्रेसी आपस में ये होड़ लगा रहा था कि मेरा बयान उसके बयान से ज्यादा बेहतर तरीके से साबित करता है कि मुसलमानों की सबसे बड़ी हितैषी काँग्रेस ही है कोई और नहीं. ये बताने की ज़रुरत नहीं कि जब-जब ऐसे संकीर्ण मानसिकता से ओत-प्रोत बयान दिए जाते हैं तो इसका फायदा सबसे ज्यादा उठाने वाले लोग और कोई नहीं बल्कि देश की विघटनकारी ताकतें ही होती हैं.

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काँग्रेस धर्म के नाम पर अपनी राजनीति की विसात बिछाने में कितना कामयाब हो पाएगी या हो पायी है ये तो अभी बताया नहीं जा सकता, लेकिन विघटनकारी शक्तियों ने इसका भरपूर फायदा उठाना शुरू कर दिया. और, इसी के परिणामस्वरूप, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का वो बयान सामने आया जिसमें उसने पूरे देश के हर जिले में मुस्लिम शरिया अदालत खोले जाने की मांग कर दी. इस मांग के आते ही जम्मू कश्मीर के डिप्टी ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम का कहना कि भारत सरकार यदि मुसलामानों को शरिया अदालत खोलने की अनुमति नहीं देता तो फिर उन्हें एक अलग मुल्क बनाकर दे दिया जाए. अभी इन बयानों का शोर थमा भी नहीं था कि भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति मो० हामिद अंसारी जो 2007 से 2017 तक भारत के उप-राष्ट्रपति रहे हैं, उनका भी एक बयान आ गया कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कि मांग जायज़ है और सरकार को इसे मानने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. 

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ऐसा पहली बार नहीं है, हामिद अंसारी इसके पहले भी कितने ही ऐसे विवादित बयान दे चुके हैं. उप राष्ट्रपति पद से हटने के तुरंत बाद भी उनका एक बयान आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और मुस्लिम अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. किन्तु, इस बार उनका बयान एक ऐसे मांग के समर्थन में  आया है जिसे किसी भी रूप में संवैधानिक नहीं कहा जा सकता. और, एक अति उच्च संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से इस तरह के असंवैधानिक मांग का समर्थन कहीं से भी जायज़ नहीं ठहराया जा सकता. राजनयिक से राजनेता बने हामिद अंसारी के ऊपर काँग्रेस के एहसानों की सूची बहुत लम्बी है और, ये बात सर्वविदित भी है. अभी हाल ही में इनका एक और शर्मसार करने वाला बयान आया है -- जिसमें उन्होंने शशि थरूर के बयान को ही दुसरे शब्दों में दोहराया है, उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि "भारत हिंदुत्व के सिद्धांतों पर आधारित एक अनुदार और जातीय मूल्यों पर केन्द्रित लोकतंत्र बनने की राह पर है."** तो क्या काँग्रेस को खुश करने के लिए भाजपा का किसी भी हद तक जाकर विरोध करना इनकी मजबूरी है? या फिर हामिद अंसारी राजनीति कीअपनी दूसरी पारी के लिए ज़मीन तैयार करना चाहते हैं?  ऐसे में ये सवाल उठना भी स्वाभाविक है कि क्या हामिद अंसारी राजनीति की दूसरी पारी खेलने के लिए बेचैन हो रहे हैं या फिर, काँग्रेस के एहसानों का क़र्ज़ अदा कर रहे हैं..???

** https://www.firstpost.com/india/hamid-ansari-warns-india-could-become-illiberal-and-ethnic-democracy-based-on-principles-of-hindutva-4764561.html

काँग्रेस ने 2019 के लिए खुद को पूरी तरह से हरा रंग डाला

चार दिन पहले राहुल गाँधी का मुसलमान बुद्धिजीवियों से गुप्त मीटिंग करना, उक्त मीटिंग में मुसलमान बुद्धिजीवियों से कथित रूप से गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान मंदिरों में जाने को लेकर माफ़ी मांगना और उन्हें आश्वस्त करते हुए ये ऐलान करना कि हाँ--काँग्रेस मुसलमानों की ही पार्टी है. उसके एक दिन बाद मुसलमानों की संस्था ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा देश भर में शरिया क़ानून लागू करने की मांग करना, और इसके एक दिन बाद काँग्रेस के बड़े और बुद्धिजीवी समझे जानेवाले नेता शशि थरूर द्वारा ये कहा जाना कि यदि 2019 के चुनाव में भाजपा इसी तरह पूर्ण बहुमत से दुबारा जीतती है तो देश का संविधान खतरे में आ जाएगा और भारत एक "हिन्दू - पाकिस्तान" में तब्दील हो जाएगा. फिर, इसके एक दिन बाद काँग्रेस द्वारा शशि थरूर के बयान से किनारा करना कि ये उनके निज़ी विचार हैं और काँग्रेस का इससे कुछ लेना-देना नहीं. क्या ये सब अलग-अलग घटनाएं हैं और इनका आपस में कोई सम्बन्ध या लेना-देना नहीं? अगर इत्तेफाक से आप ऐसा ही सोचते हैं तो शायद आप गलत हैं. 


दरअसल, ये सारी घटनाएं एक-दुसरे से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं और काँग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं.  काँग्रेस पार्टी को आगामी चुनाव में न तो किसी पार्टी से सहयोग का भरोसा है, न ही उसके पास अपना खुद का इतना जनाधार बचा है कि वो अपने अकेले के दम पर आगामी 2019 का चुनाव लड़ सके. काँग्रेस के महागठबंधन की परिकल्पना भी काँग्रेस के खुद के हक़ में नहीं हो पा रही थी. क्योंकि, यदि महागठबंधन बन भी  जाता तो उसमें काँग्रेस की हैसियत एक पिछलग्गू से अधिक की नहीं होती. ऐसी स्थिति में, काँग्रेस को महागठबंधन की अनिश्चितता से उबारने या फिर महागठबंधन में अपनी हैसियत बढाने और अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए मुस्लिम तुष्टिकरण के सिवा दूसरा और कोई विकल्प बचा ही नहीं था. और, इस काम में उसे साथ देने के लिए नए सहयोगी तलाशने की ज़रुरत नहीं थी. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से काँग्रेस का रिश्ता बहुत ही पुराना रहा है.


ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की इस मांग को जम्मू और कश्मीर के डिप्टी ग्रैंड मुफ़्ती नासिर उल इस्लाम ने सीधे हाथों से लपकते हुए एक कदम आगे बढ़ते हुए ये बयान दे डाला कि अगर भारत में रहनेवाले मुसलामानों को शरिया अदालत बनाने की इजाज़त नहीं दी जाती, तो उन्हें एक अलग मुल्क बनाकर दे दिया जाए. बात यहीं पर नही रुक रही. भाजपा ने जहाँ इन तमाम बातों को देशविरोधी, हिंदुविरोधी और साम्प्रदायिक सौहाद्र को भंग करने वाला बताते हुए इसका ज़बरदस्त विरोध किया है, वहीं पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने AIMPLB की मांग को जायज़ ठहराते हुए आग में घी डालने का काम कर दिया है. तो ऐसा करके क्या हामिद अंसारी काँग्रेस के एहसानों का क़र्ज़ अदा कर रहे हैं ? ज़रूर पढ़िए हमारा अगला पोस्ट.
काँग्रेस की इन सारी कवायदों का उसे कितना लाभ मिलेगा ये तो आने वाले चुनाव परिणामों से ही पता चलेगा लेकिन, हमने अपने 6 अप्रैल के पोस्ट में जो आशंका जताई थी वो तो अभी से ही सच होती दिख रही है.
जरूर पढ़ें -- 2019 चुनाव : क्या अब अल्लाह ही मालिक है

ये भी पढ़ें --  हाँ, काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी : राहुल गाँधी 

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हाँ, काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी : राहुल गाँधी

2019 के चुनावों की आहट अभी ठीक से सुनी भी नहीं गयी लेकिन, काँग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की बेचैनी, बौखलाहट और बदहवासी एकदम से उभर कर सामने आने लग गयी है. अपने अजीबोगरीब बयानों और हरकतों से काँग्रेस की बची-खुची साख को भी रसातल तक पहुँचाने वाले काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के एक और अजीबोगरीब बयान की खबर आज उर्दू अखबार इंक़लाब और सियासत डॉट कॉम नामक वेबसाइट पर छपी है. इस खबर के अनुसार काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा है कि -- हाँ, काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी है. यही उस खबर की हैडलाइन भी है. उक्त खबर की पुष्टि के लिए यहाँ क्लिक करें

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उर्दू अखबार इंक़लाब और सियासत डॉट कॉम की उक्त खबर के अनुसार -- मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को भुलाते हुए काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि हाँ, काँग्रेस मुसलमानों की पार्टी है क्योंकि, देश में मुसलमान कमजोर हैं और काँग्रेस हमेशा से कमजोर वर्ग के साथ रहती है. काँग्रेस पार्टी के अन्य नेताओं के भी हालिया बयानों को देखें तो एक बात स्पष्ट हो जाती है कि भाजपा के ऊपर साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने वाली पार्टी का आरोप लगाने वाली काँग्रेस ने खुद ही साम्प्रदायिक राजनीति की शुरुआत कर दी है. दो दिन पूर्व ही राहुल गाँधी का मुस्लिम बुद्धिजीवियों से गुप्त मुलाक़ात का विवाद थमने से पहले ही राहुल गाँधी का ये बयान 2019 चुनावों में काँग्रेस की रणनीति का बड़ा खुलासा है.

ये भी पढ़ें 2019 चुनाव : क्या अब अल्लाह ही मालिक है  

भ्रमास्त्र : 2019 के लिए काँग्रेस का नया अस्त्र - 2



भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में कितनी अंधी हो चुकी है काँग्रेस आज इस पोस्ट में शीर्षक के मुताबिक़ काँग्रेस के एक और झूठ की पोल खुलने की पूरी जानकारी आप सबों के समक्ष प्रस्तुत है. बात पिछले सात जुलाई कि है, जब काँग्रेस आईटी सेल प्रमुख दिव्या स्पंदना ने अपने ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से एक फर्जी वीडियो को यह बताते हुए अपलोड किया कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जयपुर रैली की विडियो है जिसमें लोग शोर मचाते हुए उनका विरोध कर रहे हैं. 

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ट्विटर पर इस वीडियो को अपलोड करते हुए दिव्या ने फेसबुक पर भी तंज कसा और लिखा कि इस वीडियो को कुछ अजीब कारणों से फेसबुक पर अपलोड नहीं कर पा रही हूँ, क्या आपलोग कोशिश करेंगे और ट्वीट करेंगे ये नरेन्द्र मोदी की आज की जयपुर रैली का वीडियो है. साथ ही उसने इस वीडियो को डाउनलोड करने का लिंक भी दिया. कुछ ही देर बाद इस विडियो को काँग्रेस पार्टी के ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से भी फेसबुक पर यह ताना मारते हुए अपलोड किया कि "अरे हम अपने फेसबुक के पेज पर यह वीडियो अपलोड नहीं कर पा रहे हैं, क्या आप बताएँगे क्यों? या हमें रविशंकर प्रसाद से बात करनी चाहिए?
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वैसे, बाद में उन्होंनें ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए और फेसबुक का धन्यवाद करते हुए ये भी ट्वीट किया कि हम इस वीडियो को फेसबुक पर भी अपलोड करने में सफल रहे.

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इस वीडियो को ट्विटर पर फैलते देर नहीं लगी और कांग्रेसी चाटुकारों ने पूरी तत्परता के साथ इस वीडियो वाले ट्वीट को रि-ट्वीट करना भी शुरू कर दिया. अगले ही दिन इसकी भनक भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को लगी और उन्होंनें बिना देर किये इस बात का पर्दाफ़ाश किया कि ट्वीटर पर काँग्रेसियों द्वारा प्रचारित किया जाने वाला वीडियो फर्ज़ी है और ये खुलासा किया कि ये वीडियो मार्च 2018 का है जब प्रधानमंत्री मोदी झुंझुनू (राजस्थान) में भाजपा कार्यकर्ताओं की सभा में पहुंचे थे. ये उस वक़्त भाजपा के पार्टी कार्यकर्ताओं के आपसी झड़प का वीडियो है. ऐसा वीडियो को देख कर समझा भी जा सकता है. वीडियो का लिंक पोस्ट के अंत में दिया गया है.

Fake_Video_Upload_By_INC_Unveiled

जैसे ही अमित मालवीय ने ये खुलासा किया काँग्रेस सकते में आ गयी और सबसे पहले राहुल गाँधी ने इस ट्वीट को अपने हैंडल से डिलीट कर दिया. पर, काँग्रेस के ऑफिसियल हैंडल @INCIndia और काँग्रेस आईटी सेल प्रमुख दिव्या स्पंदना के ट्विटर हैंडल @divyaspandana से इसे डिलीट नहीं किया गया. काँग्रेस ने अपने ऑफिसियल ट्विटर हैंडल @INCIndia पर इसके लिए माफ़ी मांगी और बेशर्मी के साथ लिखा कि...उफ्फ..ये वीडियो जयपुर में नहीं बल्कि झुंझुनू में लिया गया था, जहाँ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री मोदी उपस्थित थे, और भाजपा के कैडर आपस में लड़ पड़े थे.

Congress_Admitted_Fault_Of_Uploading_Fake_Video

वैसे काँग्रेस ने बिना माफ़ी मांगे अपनी गलती को तो क़ुबूल कर लिया लेकिन काँग्रेस की आईटी प्रमुख दिव्या स्पंदना ने तो मानो बेशर्मी की साड़ी हदें ही पर कर दी और माफ़ी भी मांगी तो इस तंज के साथ --- माफ़ी चाहती हूँ ऐसा लग रहा है मनो वीडियो कल का नहीं बल्कि पिछले मार्च का है...हे भगवान् तो क्या राजस्थान भाजपा इतना पहले ही लुट चुकी थी.??

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अब ऎसी बेशर्मी की तो काँग्रेस से उम्मीद नहीं ही थी. तो क्या...अब ये मान लिया जाए कि काँग्रेस अब इतनी लाचार हो चुकी है उसके पास अब झूठ और भ्रम फैलाने के सिवा कोई और विकल्प नहीं बचा ??? क्या करोड़ों रुपये खर्च करके काँग्रेस अपना आईटी सेल इसी तरह के झूठ और भ्रम का माहौल बनाने के लिए तैयार किया है...??? वैसे आप भी इस वीडियो को देखें और तय करें. विडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें 

हमारी कोशिश है कि अब आगे से काँग्रेस के द्वारा फैलाए जा रहे झूठों का जितना संभव हो सके पर्दाफाश करें और उसे आप सबों की नज़रों में ला सकें. इसके लिए "भ्रमास्त्र : २०१९ के लिए काँग्रेस का नया अस्त्र" एक धारावाहिक श्रृंखला के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है और ये इस कड़ी का दूसरा पोस्ट है.


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इंदिरा गाँधी को जेल से छुड़ाने के लिए विमान का अपहरण तक किया गया

आज भारतीय राजनीति में नैतिकता और शुचिता की बात करने वाली काँग्रेस के आपराधिक चरित्र के इतिहास के बारे में आज भी बहुत कम लोग ही जानते हैं. आज बात करते हैं उस विमान अपहरण की जिसका उद्देश्य 1978 के जनता पार्टी के शासनकाल में जेल में बंद तत्कालीन विरोधी दल की नेत्री इंदिरा गाँधी को जेल से छुड़ाना और उनके पुत्र संजय गाँधी के ऊपर लगे सभी केसों को ख़त्म करना था. 

Indira Gandhi And Sanjay Gandhi

जी हाँ...20 दिसंबर 1978 को इंडियन एयरलाइन्स के यात्री विमान IC 410 का अपहरण भोलानाथ पाण्डेय और देवेन्द्र पाण्डेय नामक दो व्यक्तियों ने कर लिया था और उनकी मांग थी कि जेल में बंद इंदिरा गाँधी को जेल से रिहा किया जाए और उनके पुत्र संजय गाँधी के ऊपर चल रहे सभी केस वापस ले लिए जाएँ. बाद में भोलानाथ पाण्डेय और देवेन्द्र पाण्डेय को उनकी इस सेवा के लिए पुरस्कार के स्वरुप विधान सभा के टिकट भी दिए गए. भोलानाथ पाण्डेय दो बार दोआबा, बलिया से विधान सभा के लिए चुने गए गए. बाद में उन्हें इंडियन यूथ काँग्रेस का महासचिव भी बनाया गया. देवेन्द्र पाण्डेय भी हाल तक उत्तर प्रदेश काँग्रेस कमिटी के महासचिव रहे हैं. इस पूरे घटना क्रम के बारे में आप विकिपीडिया के इस लिंक पर क्लिक कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा आप यहाँ भी क्लिक कर जानकारी ले सकते है. 


भ्रमास्त्र : 2019 के लिए काँग्रेस का नया अस्त्र

जी हाँ...सही समझा आपने यदि आपने भी इसे "भ्रमास्त्र" ही समझा है तो. काँग्रेस इस "भ्रमास्त्र" के सहारे ही आगामी 2019 के चुनावी महासमर में उतरने की तैयारी में है. काँग्रेस की तरफ से इसकी बाकायदा शुरुआत भी हो चुकी है. आइये देखें और समझें कैसे? जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, काँग्रेस के नेता बदहवासी और बेसुधी की स्थिति में आते जा रहे हैं. आये दिन किसी ना किसी काँग्रेसी नेता का कोई न कोई बयान या ट्वीट आ जाता है जिससे भाजपा के खिलाफ झूठ और भ्रम फैलाने की कोशिश की जाती है. अभी कुछ दिन पहले ट्वीटर पर काँग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह का एक ट्वीट आया था जिसमें पाकिस्तान के एक पुल को भोपाल का निर्माणाधीन पुल बताकर भ्रम फैलाने की कोशिश की गयी थी.

Fake Image Posted By Digvijay Singh Congress

जैसे ही दिग्विजय सिंह ने ये ट्वीट किया, अखबारों ने भी इस ट्वीट को एक खबर की तरह प्रकाशित कर दिया और अचानक से एक बड़े झूठ को और भी ज्यादा फलने-फूलने का मौका मिल गया. ट्वीटर और फिर अखबारों के माध्यम से ये झूठ देश के करोड़ों लोगों तक पहुँच गया. देखिये, क्या लिखा था दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में.
Misleading Tweet Of Digvijay Singh Congress

बाद में, ट्वीटर के ही एक यूजर ने इस झूठ का पर्दाफाश किया और बताया कि ट्वीट में दिखाई गयी तसवीरें फर्जी हैं. लेकिन, काँग्रेस की सेहत पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. आज तक दिग्विजय सिंह ने इस ट्वीट के लिए न तो माफ़ी मांगी न ही उन्होंने इसे डिलीट ही किया. वैसे, माफी मांग लेने या डिलीट कर देने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता. क्योंकि, जितना भ्रम फैलना था वो तो फ़ैल गया. जिस तादाद में इनकी ओर से ये भ्रम फैलाए जा रहे हैं, तो ये संभव नहीं कि उनके हर झूठ को समय रहते बेनकाब भी किया जा सके. तथापि, हमारी कोशिश है कि अब आगे से काँग्रेस के द्वारा फैलाए जा रहे झूठों का जितना संभव हो सके पर्दाफाश करें और उसे आप सबों की नज़रों में ला सकें. इसके लिए "भ्रमास्त्र : २०१९ के लिए काँग्रेस का नया अस्त्र" एक धारावाहिक श्रृंखला के तौर पर प्रस्तुत किया जाएगा.


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